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न जाने क्या हैं दिले -ए -तमन्ना उनकी

कौन कहता है "दीपक" तुने मुहब्बत न की , जान दे दी मगर उनको यकीं न हुआ............... ********************************************* उनकी बातों का दिल पे असर अब नहीं होता ........ सुना हैं जब से वो बेवफा हो गए ****************************************** वो ढाते गए सितम पे सितम हमने उफ्फ भी की तो शिकयत हो गई ..... *************************************************** न जाने क्या हैं दिले -ए -तमन्ना उनकी , एक दिल जो कभी था हीं नहीं , एक जां जो अब हैं हीं नहीं ******************************************************

कुछ युहीं................

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अच्छा किया जो तुने वफ़ा नहीं किया , ज़िन्दगी जीने का सलीका तो सिखा दिया मिलते थे तुम से तो गम रहते थे . आज खुद को समझाना तो बता दिया .. कहते हैं मुहब्बत में दुनिया हसीं होती है .. हमें तो अब पता चला ये दुनिया क्या होती है ......... उड़ते थे हवाओं में पहले अक्सर .. आज जमीं का अहसास बता दिया ......... अब कोई बात दिल पे असर नहीं करती " दीपक" सुना है जब से वो कफा (बेवफा ) हो गए ............ अच्छा किया जो तुने वफ़ा नहीं किया , ज़िन्दगी जीने का सलीका तो सिखा दिया.....