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इश्क की गली से गुजरते गए

इश्क की हर गली से गुजरते गए, पूछता नाम -पता तेरा और संभलते गए..... लब बोलतें हैं खामोशियों में भी अब तलक , दीवानों की हर इमतिहाँ से गुजरते गए ..... यकीं था न पाएंगे तुम्हे कभी, फिर भी... , ख्वाहिसों को जलाते गए .... हमने तो उम्र गुजारी उनकी रह गुज़र पर, न चलेंगे कुछ डगर वो समझाते गए ... ......