Posts

Showing posts from 2010
पाके मंजिल , अच्छा नहीं लगता , दूर तुझसे ये मंजर ,अच्छा नहीं लगता , बदलते रहे शहर -दर - शहर, शुकून-ए- दिल के लिए , ये सफ़र , अच्छा नहीं लगता ...... ------------------------------------- नॉट कोम्प्लितेड---

इश्क की गली से गुजरते गए

इश्क की हर गली से गुजरते गए, पूछता नाम -पता तेरा और संभलते गए..... लब बोलतें हैं खामोशियों में भी अब तलक , दीवानों की हर इमतिहाँ से गुजरते गए ..... यकीं था न पाएंगे तुम्हे कभी, फिर भी... , ख्वाहिसों को जलाते गए .... हमने तो उम्र गुजारी उनकी रह गुज़र पर, न चलेंगे कुछ डगर वो समझाते गए ... ......

मना लो जस्न मेरी बर्बादी

माना लो जस्न मेरी बर्बादी की दुनिया वालों...... सुना है वो अभी बहुत सुकून पातें हैं ............ जिन्हें हम पा न सके हकिकत में सही ........ उन्हें अब ख्वाब में भी पाने से डर लगता है...... माना लो जस्न ............... बढ़ी हैं दूरियां आज इतनी अपने दर्मिया....... किसे यकीं हैं, कभी साथ भी चलें................ अब तो ये आलम है की , हर हिचकी पे डर लगता है........... उनकी बातों में कहीं अपना जिक्र सा लगता है..... माना लो जस्न ................... मेरी वफाओं का खुदा, इतना सा सफ़क देना ..... मेरे जनाजे की राह में उनका घर देना ............. माना लो जस्न मेरी बर्बादी की दुनिया वालों .... सुना है वो भी बहुत सुकून पातें हैं ................