यूँ तेरा सामना मैं करूँगा कैसे
यूँ तेरा सामना मैं करूँगा कैसे , यूँ नम आंखों से फिर हसूंगा कैसे , होगा पूछना जो खैरियते हालत मेरी , कपकपाते हुए होठों से फिर कहूँगा कैसे .... नब्ज़ रुकी सांसे थमी-- फिर दिल में एक आह भरूँगा कैसे, मैं जनता हूँ -- न झपकेगी पलके न होश होगा , पत्थर के बुत में फिर जान भरूँगा कैसे ... मैं सोचता हूँ -- रातों को अकेले में , क्या हकीक़त में तेरा सामना होगा ? "यूँ डरता था पहले कहीं तू मुझसे जुदा न हो , अब ये दुआ है की तेरा सामना न हो "