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सुना है की वो आयें हैं शहर में........

सुना है की वो आयें हैं शहर में , ऐ दिल-ए-नादाँ बता तेरी आरजू क्या है ... गूंज उठी है , फजाओं में तर्रनुम , अब ये हर जगह में "रागिनी" क्या है यूँ हर तरफ है चर्चा हुस्न -ए- यार के मेरे , ए-दीपक बता ये माजरा क्या है सुना है की वो आयें हैं शहर में , ए-दिल-ए नादाँ बता ये आरजू क्या है ........

यूँ तेरा सामना मैं करूँगा कैसे

यूँ तेरा सामना मैं करूँगा कैसे ,  यूँ नम आंखों से फिर हसूंगा कैसे , होगा पूछना जो खैरियते हालत मेरी , कपकपाते हुए होठों से फिर कहूँगा कैसे .... नब्ज़ रुकी सांसे थमी-- फिर दिल में एक आह भरूँगा कैसे, मैं जनता हूँ -- न झपकेगी पलके न होश होगा , पत्थर के बुत में फिर जान भरूँगा कैसे ... मैं सोचता हूँ -- रातों को अकेले में , क्या हकीक़त में तेरा सामना होगा ? "यूँ डरता था पहले कहीं तू मुझसे जुदा न हो , अब ये दुआ है की तेरा सामना न हो "

न जाने क्या हैं दिले -ए -तमन्ना उनकी

कौन कहता है "दीपक" तुने मुहब्बत न की , जान दे दी मगर उनको यकीं न हुआ............... ********************************************* उनकी बातों का दिल पे असर अब नहीं होता ........ सुना हैं जब से वो बेवफा हो गए ****************************************** वो ढाते गए सितम पे सितम हमने उफ्फ भी की तो शिकयत हो गई ..... *************************************************** न जाने क्या हैं दिले -ए -तमन्ना उनकी , एक दिल जो कभी था हीं नहीं , एक जां जो अब हैं हीं नहीं ******************************************************

कुछ युहीं................

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अच्छा किया जो तुने वफ़ा नहीं किया , ज़िन्दगी जीने का सलीका तो सिखा दिया मिलते थे तुम से तो गम रहते थे . आज खुद को समझाना तो बता दिया .. कहते हैं मुहब्बत में दुनिया हसीं होती है .. हमें तो अब पता चला ये दुनिया क्या होती है ......... उड़ते थे हवाओं में पहले अक्सर .. आज जमीं का अहसास बता दिया ......... अब कोई बात दिल पे असर नहीं करती " दीपक" सुना है जब से वो कफा (बेवफा ) हो गए ............ अच्छा किया जो तुने वफ़ा नहीं किया , ज़िन्दगी जीने का सलीका तो सिखा दिया.....