पाके मंजिल , अच्छा नहीं लगता , दूर तुझसे ये मंजर ,अच्छा नहीं लगता , बदलते रहे शहर -दर - शहर, शुकून-ए- दिल के लिए , ये सफ़र , अच्छा नहीं लगता ...... ------------------------------------- नॉट कोम्प्लितेड---
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मना लो जस्न मेरी बर्बादी
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माना लो जस्न मेरी बर्बादी की दुनिया वालों...... सुना है वो अभी बहुत सुकून पातें हैं ............ जिन्हें हम पा न सके हकिकत में सही ........ उन्हें अब ख्वाब में भी पाने से डर लगता है...... माना लो जस्न ............... बढ़ी हैं दूरियां आज इतनी अपने दर्मिया....... किसे यकीं हैं, कभी साथ भी चलें................ अब तो ये आलम है की , हर हिचकी पे डर लगता है........... उनकी बातों में कहीं अपना जिक्र सा लगता है..... माना लो जस्न ................... मेरी वफाओं का खुदा, इतना सा सफ़क देना ..... मेरे जनाजे की राह में उनका घर देना ............. माना लो जस्न मेरी बर्बादी की दुनिया वालों .... सुना है वो भी बहुत सुकून पातें हैं ................
यूँ तेरा सामना मैं करूँगा कैसे
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यूँ तेरा सामना मैं करूँगा कैसे , यूँ नम आंखों से फिर हसूंगा कैसे , होगा पूछना जो खैरियते हालत मेरी , कपकपाते हुए होठों से फिर कहूँगा कैसे .... नब्ज़ रुकी सांसे थमी-- फिर दिल में एक आह भरूँगा कैसे, मैं जनता हूँ -- न झपकेगी पलके न होश होगा , पत्थर के बुत में फिर जान भरूँगा कैसे ... मैं सोचता हूँ -- रातों को अकेले में , क्या हकीक़त में तेरा सामना होगा ? "यूँ डरता था पहले कहीं तू मुझसे जुदा न हो , अब ये दुआ है की तेरा सामना न हो "
न जाने क्या हैं दिले -ए -तमन्ना उनकी
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कौन कहता है "दीपक" तुने मुहब्बत न की , जान दे दी मगर उनको यकीं न हुआ............... ********************************************* उनकी बातों का दिल पे असर अब नहीं होता ........ सुना हैं जब से वो बेवफा हो गए ****************************************** वो ढाते गए सितम पे सितम हमने उफ्फ भी की तो शिकयत हो गई ..... *************************************************** न जाने क्या हैं दिले -ए -तमन्ना उनकी , एक दिल जो कभी था हीं नहीं , एक जां जो अब हैं हीं नहीं ******************************************************
कुछ युहीं................
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अच्छा किया जो तुने वफ़ा नहीं किया , ज़िन्दगी जीने का सलीका तो सिखा दिया मिलते थे तुम से तो गम रहते थे . आज खुद को समझाना तो बता दिया .. कहते हैं मुहब्बत में दुनिया हसीं होती है .. हमें तो अब पता चला ये दुनिया क्या होती है ......... उड़ते थे हवाओं में पहले अक्सर .. आज जमीं का अहसास बता दिया ......... अब कोई बात दिल पे असर नहीं करती " दीपक" सुना है जब से वो कफा (बेवफा ) हो गए ............ अच्छा किया जो तुने वफ़ा नहीं किया , ज़िन्दगी जीने का सलीका तो सिखा दिया.....