मुझसे मेरा खबर पूछते हैं
लोग मुझे अब किधर पूछते हैं ,
थी लबो पे हंसी मेले थे घर में
उदास खंडहरों को लोग किधर पूछते हैं
कौन सी सूरत है जिसमे लोग से लोग मिले
हम जब भी मिले लोग मतलब पूछते हैं ,
डुबों के तूफा में कशती हमारी
लोग हमसे हमारा हुनर पूछते हैं
लोग मुझे अब किधर पूछते हैं ,
थी लबो पे हंसी मेले थे घर में
उदास खंडहरों को लोग किधर पूछते हैं
कौन सी सूरत है जिसमे लोग से लोग मिले
हम जब भी मिले लोग मतलब पूछते हैं ,
डुबों के तूफा में कशती हमारी
लोग हमसे हमारा हुनर पूछते हैं
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