बात करो तो बेरुखी से करो
नफरत सही पर दिल से करो ,

तेरे महफ़िल में मेरा नाम
क़त्ल सही , पर इल्जाम तो धरो ,

बहुत हो गया सजदे करते करते
वाली सही पर काफ़िर तो करो ,

रिश्तों में जो हो गई दूरियां
चुप सही पर हलचल तो करो ,

गरीबों के बर्तन खाली खनकते है
राख सही पर धुंआ तो करो

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