तू  कहती है, दीपक ,तेरे  लिए तुझसे बात नहीं करती,
मैं कैसे कहूँ , हर  आहट पे दिल तुझे  ढूंढ़ता है

तू कहती है, मेरी हर छोटी बात क्यूँ याद रखते हो ,
मैं कैसे कहूँ, तेरे सिवा कुछ याद नहीं रहता है

तू कहती है , तुझे रात को नींद क्यूँ नहीं आती ,
मैं कैसे कहूँ , पलके दीवारों पे तेरी सकल ढूँढती है

तू कहती है , तुम मुझे भूल क्यूँ नहीं जाते
मैं कैसे कहूँ ,  तुझे किताबों के जवाबों सा नहीं पढ़ा है

तू कहती है , दीपक मेरे बैगैर तू कैसे जीता है ,
मैं कैसे कहूँ , दिन गुजरता है ज़िन्दगी अब भी वही पर है

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