मैं ये सोचूं की तू बेवफा हो जाये
कुछ और जी लूँ ,अगर ऐसा हो जाये ,
ग़ज़ल के शेर अब नहीं पकते
अबकी जो तू रूठे , एक खंजर हो जाये
होगा कोई दिन मेरा भी दुआ कबूल
कोई तेरा हो और तुझसा हो जाये ,
मैं खुद को पत्थर कर लूँ
मगर जब दिल रोये तो लहू हो जाए ,
बेवजह नहीं है सांसो का थमना
मुझे देखे और वो संवर जाये ,
कुछ और जी लूँ ,अगर ऐसा हो जाये ,
ग़ज़ल के शेर अब नहीं पकते
अबकी जो तू रूठे , एक खंजर हो जाये
होगा कोई दिन मेरा भी दुआ कबूल
कोई तेरा हो और तुझसा हो जाये ,
मैं खुद को पत्थर कर लूँ
मगर जब दिल रोये तो लहू हो जाए ,
बेवजह नहीं है सांसो का थमना
मुझे देखे और वो संवर जाये ,
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